श्री वृंदावन माधुरी, कैसे कैं कहि जाइ।
शेष सहस्त्र मुख कहि थके, अजहुँ पार न पाइ॥
- श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री वृंदावन माधुरी (26)
श्री वृन्दावन की माधुरी का वर्णन किस प्रकार किया जाए? जिसका वर्णन करते-करते सहस्रमुखी शेषनाग भी थक गए और श्री ब्रह्मा जी भी उसका पार न पा सके।
शेष सहस्त्र मुख कहि थके, अजहुँ पार न पाइ॥
- श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री वृंदावन माधुरी (26)
श्री वृन्दावन की माधुरी का वर्णन किस प्रकार किया जाए? जिसका वर्णन करते-करते सहस्रमुखी शेषनाग भी थक गए और श्री ब्रह्मा जी भी उसका पार न पा सके।

