वंशीवट की माधुरी जो कहिये कछु बैन - श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (230)

वंशीवट की माधुरी जो कहिये कछु बैन - श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (230)

वंशीवट की माधुरी, जो कहिये कछु बैन।
नैनन रसना कीजिये, रसना कीजै नैन॥

- श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (230)

वंशीवट की उस अलौकिक मधुरता का वर्णन शब्दों में कैसे किया जाए? यदि उसका बखान करना हो, तो नेत्रों में रस भरकर उसको जिह्वा बनाना होगा (देखने के लिए) और जिह्वा को नेत्र बनाना होगा (आस्वादन करने के लिए)।