वृन्दावन एक पलक जो रहिये - श्री सूरदास, सूर सागर

वृन्दावन एक पलक जो रहिये - श्री सूरदास, सूर सागर

(राग विहाग)
वृन्दावन एक पलक जो रहिये।
जन्म जन्म के पाप कटत है,
कृष्ण-कृष्ण मुख गइये॥ [1]
महाप्रसाद और जल जमुना को,
तनक- तनक भर लइये।
'सूरदास' वैकुन्ठ मधुपुरी,
भाग्य बिना नहीं पइये॥ [2]

- श्री सूरदास, सूर सागर

जो एक पल के लिए भी श्री वृन्दावन का वास करता है और मुख से कृष्ण नाम का उच्चारण करता है, उसके जन्म-जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं। [1]

श्री सूरदास कहते हैं "ब्रज भूमि का वास प्राप्त हो तो श्री हरि का महाप्रसाद पाओ और श्री यमुना जी का जलपान करो, क्यूँकि वैकुण्ठ के समान इस ब्रज भूमि का वास बड़े भाग्य से प्राप्त होता है।"