सकल भक्त जो कोटि हौं तामें सुद्ध जो एक - श्री मनोहरदास जी

सकल भक्त जो कोटि हौं तामें सुद्ध जो एक - श्री मनोहरदास जी

सकल भक्त जो कोटि हौं, तामें सुद्ध जो एक।
कोटि सुद्ध सम रसिक एक, रसिक अनन्य विशेष॥

- श्री मनोहरदास जी

कोटि भक्तों में एक ही विशुद्ध भक्त होता है, और उन कोटि विशुद्ध भक्तों में भी एक रसिक होता है; तथा उन रसिकों में भी अनन्य रसिक अत्यन्त दुर्लभ होता है।