जो चाहौ सो करौ कुँवरि, त्रिविध तम हरना।
अलबेलीअलि परी आनि, पद-पंकज-सरना॥
- श्री अलबेली अलि, विनय कुंडलियाँ (17)
हे श्री राधे! आप ही तीनों प्रकार के तापों और अज्ञान रूपी अंधकार का हरण करने वाली हैं।। श्री अलबेली अलि आपके चरण-कमलों की शरण में आ चुकी है; अब आपको जैसा भावे वैसा ही कीजिए।
अलबेलीअलि परी आनि, पद-पंकज-सरना॥
- श्री अलबेली अलि, विनय कुंडलियाँ (17)
हे श्री राधे! आप ही तीनों प्रकार के तापों और अज्ञान रूपी अंधकार का हरण करने वाली हैं।। श्री अलबेली अलि आपके चरण-कमलों की शरण में आ चुकी है; अब आपको जैसा भावे वैसा ही कीजिए।

