(राग सोरठ)
सखी री पोढ़े राधा रवन।
आवागमन नहीं काहू को भामिनी के भवन॥ [1]
सीख मोरीमान हो सजनी प्रात उठि कीजे हो गमन।
गोविन्द प्रभु पिय केलि करत है कंस काली दमन॥ [2]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी
श्री गोविन्द स्वामी किसी सखी से कहते हैं "अरी सखी, श्री राधा कृष्ण निकुंज में विश्राम कर रहे हैं, इस समय वहां किसी का भी आना जाना नहीं होता।" [1]
मेरा कहना मान सखी, अब तू विश्राम कर और सुबह उठ कर दर्शन करने जाना, इस समय कंस और कालिय नाग के दमन करने वाले श्री कृष्ण राधा संग केलि परायण हैं। [2]
सखी री पोढ़े राधा रवन।
आवागमन नहीं काहू को भामिनी के भवन॥ [1]
सीख मोरीमान हो सजनी प्रात उठि कीजे हो गमन।
गोविन्द प्रभु पिय केलि करत है कंस काली दमन॥ [2]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी
श्री गोविन्द स्वामी किसी सखी से कहते हैं "अरी सखी, श्री राधा कृष्ण निकुंज में विश्राम कर रहे हैं, इस समय वहां किसी का भी आना जाना नहीं होता।" [1]
मेरा कहना मान सखी, अब तू विश्राम कर और सुबह उठ कर दर्शन करने जाना, इस समय कंस और कालिय नाग के दमन करने वाले श्री कृष्ण राधा संग केलि परायण हैं। [2]

