वृदावनको जाना हेली वृदावन को जाना है - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (288)

वृदावनको जाना हेली वृदावन को जाना है - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (288)

(राग जिला)
वृदावनको जाना हेली वृदावन को जाना है।
रसिक रँगीले राधामोहन तिनसों दिल लहिराना है॥ [1]
ललितकिशोरी ने दृढकर अब येही मनमें ठाना है।
ललितलता निधुवन के नीचे ह्वाँईं ठीक ठिकाना है॥ [2]

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (288)

यह पद श्री ललित किशोरी जी ने वृन्दावन आगमन से पूर्व लिखा था जिसमें वह कहते हैं कि, हे सखी, मुझे तो अब केवल वृन्दावन जाना है। रसिक रंगीली जोड़ी श्री राधा कृष्ण को ही अनन्य रूप से ह्रदय समर्पित करना है।" [1]

मैंने अपने मन में यही दृढ निश्चय कर लिया है कि मुझे वृन्दावन का ही आश्रय ग्रहण करना है। वहां निधिवन की ललित लताओं के नीचे ही मेरा वास होगा। [2]