श्री राधावल्लभ लाल की आरती - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (20)

श्री राधावल्लभ लाल की आरती - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (20)

(राग सारंग)
श्री राधावल्लभ लाल की आरती ।
रतन जटित कंचन की मनिमय, हित सौं सहचरि वारती ।। [1]
अंग-अंग की आभा झलकत, अद्भुत रूप निहारती ।
'हित ध्रुव' सखी प्रेम की सीवा, कैसेहुँ पलक न टारती ।। [2]

- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (20)

श्री राधावल्लभ लाल की आरती जो कञ्चन निर्मित मणिमयी एवं रत्न जटित है, सहचरियाँ प्रीतिपूर्वक वार (उतार) रही हैं । [1]

आरती के समय श्री राधावल्लभ लाल के प्रत्यक्ष की प्रभा एवं उनके अद्भुत रूप को सखियाँ निहार रही हैं। श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं कि प्रेम की अवधि - सखियाँ श्री राधावल्लभ लाल के रूप पर विमुग्ध हैं, वे एक पलक का भी अन्तराय सहन नहीं कर सकतीं । [2]