अजाण्डे राधेति स्फुरदभिधया सिक्तजनयाऽनया साकं कृष्ण भजति य इह प्रेमनमितः।
परं प्रक्षाल्यैतच्चरणकमले तज्जलमहो मुदा पीत्वा शश्वच्छिरसि च वहामि प्रतिदिनम्॥
- श्री रघुनाथ दास गोस्वामी - स्व: नियम दशकम (7)
इस ब्रह्माण्ड में जो व्यक्ति 'श्रीराधा'- इस उज्ज्वल नाम द्वारा सब मनुष्यों को प्रेम-पूर्वक नमस्कार करते हुए श्री कृष्ण का भजन करता है, अहह ! प्रतिदिन उस व्यक्ति के श्रीचरण-कमलों को धोकर मैं उस चरणामृत को अतिशय आनन्दपूर्वक हर समय पान कर मस्तक पर धारण करूँगा।
परं प्रक्षाल्यैतच्चरणकमले तज्जलमहो मुदा पीत्वा शश्वच्छिरसि च वहामि प्रतिदिनम्॥
- श्री रघुनाथ दास गोस्वामी - स्व: नियम दशकम (7)
इस ब्रह्माण्ड में जो व्यक्ति 'श्रीराधा'- इस उज्ज्वल नाम द्वारा सब मनुष्यों को प्रेम-पूर्वक नमस्कार करते हुए श्री कृष्ण का भजन करता है, अहह ! प्रतिदिन उस व्यक्ति के श्रीचरण-कमलों को धोकर मैं उस चरणामृत को अतिशय आनन्दपूर्वक हर समय पान कर मस्तक पर धारण करूँगा।

