(राग कल्याण)
तेरो मुख नीको कि मेरो स्यामा प्यारी ?
दर्पन हाथ लिये नंदनंदन सांचि कहो वृषभानुदुलारी॥ [1]
हम का कहें तुमहिं किन देखो मैं गोरी तुम श्याम बिहारी।
हमरो मुख ज्यों चंद उज्यारी तुमरो मुख ज्यों रैन अँधियारी॥ [2]
सुनि सुनि बचन हँसत मन मोहन बार बार मुख चंद निहारी।
'चन्द्रसखी' भज बाल कृष्ण छबि दोउ दिसि प्रीत बढ़ी अति भारी॥ [3]
- श्री चन्द्रसखी जी, चंद्रसखी पदावाली (13)
श्री कृष्ण हाथ में दर्पण लिए श्री राधा से कहते हैं "हे श्यामा प्यारी, आपका मुख सुन्दर है की मेरा मुख?" [1]
श्री राधा कहती हैं "मैं क्या कहूँ, आप स्वयं ही देख लीजिये, मैं गौर वर्ण की हूँ और आप श्याम वर्ण के हैं। मेरा मुख चंद्र के समान प्रकाशयुक्त है और आपका मुख अंधेरी रात के समान है।" [2]
श्री राधा के वचन सुनकर श्री कृष्ण हँसने लगते हैं और बार-बार श्री राधा के मुख चंद्र को निहारते हैं। श्री चंद्रसखी [अपने गुरु बालकृष्ण जी के रूप को याद कर] कहते हैं कि "श्री राधा कृष्ण के ह्रदय में एक दूसरे के लिए अति उत्कट प्रेम प्रकट हो रहा है, इसलिए हे मन, तू इस छवि का चिंतन कर।" [3]
तेरो मुख नीको कि मेरो स्यामा प्यारी ?
दर्पन हाथ लिये नंदनंदन सांचि कहो वृषभानुदुलारी॥ [1]
हम का कहें तुमहिं किन देखो मैं गोरी तुम श्याम बिहारी।
हमरो मुख ज्यों चंद उज्यारी तुमरो मुख ज्यों रैन अँधियारी॥ [2]
सुनि सुनि बचन हँसत मन मोहन बार बार मुख चंद निहारी।
'चन्द्रसखी' भज बाल कृष्ण छबि दोउ दिसि प्रीत बढ़ी अति भारी॥ [3]
- श्री चन्द्रसखी जी, चंद्रसखी पदावाली (13)
श्री कृष्ण हाथ में दर्पण लिए श्री राधा से कहते हैं "हे श्यामा प्यारी, आपका मुख सुन्दर है की मेरा मुख?" [1]
श्री राधा कहती हैं "मैं क्या कहूँ, आप स्वयं ही देख लीजिये, मैं गौर वर्ण की हूँ और आप श्याम वर्ण के हैं। मेरा मुख चंद्र के समान प्रकाशयुक्त है और आपका मुख अंधेरी रात के समान है।" [2]
श्री राधा के वचन सुनकर श्री कृष्ण हँसने लगते हैं और बार-बार श्री राधा के मुख चंद्र को निहारते हैं। श्री चंद्रसखी [अपने गुरु बालकृष्ण जी के रूप को याद कर] कहते हैं कि "श्री राधा कृष्ण के ह्रदय में एक दूसरे के लिए अति उत्कट प्रेम प्रकट हो रहा है, इसलिए हे मन, तू इस छवि का चिंतन कर।" [3]

