केवल पैये प्रेम में प्यारो !
नहीं ज्ञान में नहीं ध्यान में कर्म नेम ते न्यारो॥ [1]
नहीं भारत में नहीं रामायण स्मृति वेदन में नाहीं।
नहीं झगरे में नहीं युक्ति में नहीं मतभेदन माहीं॥ [2]
नहीं मन्दिर में नहीं पूजा में नहीं घंटा की घोर।
'हरिचंद' वह बांध्यो डोले एक प्रेम की डोर॥ [3]
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, जैन कुतूहल (13)
श्री हरिचंद जी कहते हैं "श्री कृष्ण न ज्ञान से प्राप्त हो सकते हैं न ध्यान से, वे सब कर्मों एवं नियमों से न्यारे हैं, उन्हें केवल प्रेम से ही पाया जा सकता है।" [1]
श्री कृष्ण न महाभारत, रामायण, स्मृति, शास्त्र पढ़ने से प्राप्त होंगे न वेद श्रुति पढ़ने से, वे चतुराई एवं जात-पात के झगडे से सर्वथा परे हैं, प्रेम के सिवा किसी अन्य युक्ति से श्री कृष्ण को प्राप्त नहीं किया जा सकता।" [2]
श्री कृष्ण न मंदिर जाने से प्राप्त होंगे न पूजा करने से और ना ही घंटा बजाने से। श्री हरिचंद जी कहते हैं "श्री कृष्ण तो केवल प्रेम के बंधन में बंध कर भक्त के पीछे-पीछे डोलते हैं।" [3]
नहीं ज्ञान में नहीं ध्यान में कर्म नेम ते न्यारो॥ [1]
नहीं भारत में नहीं रामायण स्मृति वेदन में नाहीं।
नहीं झगरे में नहीं युक्ति में नहीं मतभेदन माहीं॥ [2]
नहीं मन्दिर में नहीं पूजा में नहीं घंटा की घोर।
'हरिचंद' वह बांध्यो डोले एक प्रेम की डोर॥ [3]
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, जैन कुतूहल (13)
श्री हरिचंद जी कहते हैं "श्री कृष्ण न ज्ञान से प्राप्त हो सकते हैं न ध्यान से, वे सब कर्मों एवं नियमों से न्यारे हैं, उन्हें केवल प्रेम से ही पाया जा सकता है।" [1]
श्री कृष्ण न महाभारत, रामायण, स्मृति, शास्त्र पढ़ने से प्राप्त होंगे न वेद श्रुति पढ़ने से, वे चतुराई एवं जात-पात के झगडे से सर्वथा परे हैं, प्रेम के सिवा किसी अन्य युक्ति से श्री कृष्ण को प्राप्त नहीं किया जा सकता।" [2]
श्री कृष्ण न मंदिर जाने से प्राप्त होंगे न पूजा करने से और ना ही घंटा बजाने से। श्री हरिचंद जी कहते हैं "श्री कृष्ण तो केवल प्रेम के बंधन में बंध कर भक्त के पीछे-पीछे डोलते हैं।" [3]

