पृथक आवास योग, दुखमय विषय भोग - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (31)

पृथक आवास योग, दुखमय विषय भोग - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (31)

पृथक आवास योग, दुखमय विषय भोग, व्रजवास गोविन्द-सेवन।
कृष्णकथा कृष्णनाम, सत्य सत्य रसधाम, व्रजजनेर सङ्ग अनुक्षण॥

- श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (31)

व्रजमण्डल को छोड़कर जो अन्यत्र वास है, वह विषय भोग की तरह दुखमय है। व्रजवास तो श्रीगोविन्द-सेवन ही है, क्योंकि व्रजवासियों के साथ प्रतिक्षण श्रीकृष्णकथा एवं श्रीकृष्णनाम का स्मरण होता है, जो वास्तव में सच्चा रस-भण्डार है।