श्री श्यामां मधुरस्वरां सुनयनां कृष्णप्रियां बुद्धिदाम्। सर्वाभीष्टप्रदां सुलक्षणयुतां स्वीयेषुप्रेमप्रदां॥
आराध्यां च सुपूजितां सुललितां सर्वाङ्गशोभा भृताम्। वन्दे तां परमेश्वरीं सुखमयीं श्रीकृष्णवामस्थिताम्॥
- श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामीनी जी ध्यानम (7)
श्रीराधा की वाणी मधुर है और आंखें अति सुन्दर हैं, वे बहुत बुद्धिमान हैं और श्रीकृष्ण की प्रिय हैं। वे समस्त लक्षणों से परिपूर्ण हैं जो अपनी दासियों को प्रेम प्रदान करती हैं और सर्व इच्छा को पूर्ण करनेवाली हैं। मैं उन श्री राधा की आराधना एवं पूजा करता हूँ, जिनके समस्त अंग अत्यंत सुंदर हैं। जो श्री कृष्ण के वाम भाग में अवस्थित हैं, उन परम सुखमयी परमेश्वरि श्री राधा की मैं बार-बार वंदना करता हूँ।
आराध्यां च सुपूजितां सुललितां सर्वाङ्गशोभा भृताम्। वन्दे तां परमेश्वरीं सुखमयीं श्रीकृष्णवामस्थिताम्॥
- श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामीनी जी ध्यानम (7)
श्रीराधा की वाणी मधुर है और आंखें अति सुन्दर हैं, वे बहुत बुद्धिमान हैं और श्रीकृष्ण की प्रिय हैं। वे समस्त लक्षणों से परिपूर्ण हैं जो अपनी दासियों को प्रेम प्रदान करती हैं और सर्व इच्छा को पूर्ण करनेवाली हैं। मैं उन श्री राधा की आराधना एवं पूजा करता हूँ, जिनके समस्त अंग अत्यंत सुंदर हैं। जो श्री कृष्ण के वाम भाग में अवस्थित हैं, उन परम सुखमयी परमेश्वरि श्री राधा की मैं बार-बार वंदना करता हूँ।

