(राग गौरी)
सुभग सुहाग को चिनौं प्यारी तेरे चरननि सोहै।
जिनकी रज राजत वृन्दावन, देखत ही मोहन मनमोहै॥ [1]
गौर अङ्ग छबि श्यामहि फबि गई, सकल लोक चूड़ामनि जोहै।
व्यास स्वामिनी की उपमा कौं भुवनचतुर्दस कामिनि कोहै॥ [2]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्द्ध (81)
सखी भाव में अवस्थित श्री हरिराम व्यास श्री राधा से कहते हैं "हे प्यारी जू, परम सुभग श्री श्यामसुंदर के सुहाग चिन्ह तो आपके चरणों में शोभायमान है, एवं श्री वृन्दावन की रज में इन्हीं चरण कमलों के चिन्ह श्री कृष्ण के मन को मोह लेते हैं।" [1]
श्री राधा के सुन्दर गौर अंगों की छवि का दर्शन कर श्री कृष्ण भी प्रेमासक्त हो जाते हैं, जो समस्त लोकों के चूड़ामणि हैं। श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं "चौदह लोकों में ऐसी कौन सुंदरी है जो श्री स्वामिनी जू के उपमा के भी लायक है।" [2]
सुभग सुहाग को चिनौं प्यारी तेरे चरननि सोहै।
जिनकी रज राजत वृन्दावन, देखत ही मोहन मनमोहै॥ [1]
गौर अङ्ग छबि श्यामहि फबि गई, सकल लोक चूड़ामनि जोहै।
व्यास स्वामिनी की उपमा कौं भुवनचतुर्दस कामिनि कोहै॥ [2]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्द्ध (81)
सखी भाव में अवस्थित श्री हरिराम व्यास श्री राधा से कहते हैं "हे प्यारी जू, परम सुभग श्री श्यामसुंदर के सुहाग चिन्ह तो आपके चरणों में शोभायमान है, एवं श्री वृन्दावन की रज में इन्हीं चरण कमलों के चिन्ह श्री कृष्ण के मन को मोह लेते हैं।" [1]
श्री राधा के सुन्दर गौर अंगों की छवि का दर्शन कर श्री कृष्ण भी प्रेमासक्त हो जाते हैं, जो समस्त लोकों के चूड़ामणि हैं। श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं "चौदह लोकों में ऐसी कौन सुंदरी है जो श्री स्वामिनी जू के उपमा के भी लायक है।" [2]

