श्रीराधिकां निजविटेन सहालपन्तीम् शोणाधरप्रसृमरच्छविमञ्जरीकाम्।
सिन्दूरसंवलितमौक्तिकपंक्तिशोभाम् यो भावयेद्दशनकुन्दवतीं स धन्यः॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (28)
श्रीप्रियाजी अपने प्रियतम श्रीलालजी के साथ कुछ मधुर मधुर बातें कर रही हैं, जिससे उनके लाल-लाल ओठों से सौन्दर्य्य-राशि निकल निकलकर चारों ओर फैल रही है। अहा ! जिनके विशाल भाल पर सिन्दूर-रञ्जित मोतियों की पंक्ति शोभायमान् है और दन्त पंक्ति कुन्द-कलियों को भी लज्जित कर रही है । वही धन्य हैं जो ऐसी श्रीप्रियाजी के भावना परायण हैं।
सिन्दूरसंवलितमौक्तिकपंक्तिशोभाम् यो भावयेद्दशनकुन्दवतीं स धन्यः॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (28)
श्रीप्रियाजी अपने प्रियतम श्रीलालजी के साथ कुछ मधुर मधुर बातें कर रही हैं, जिससे उनके लाल-लाल ओठों से सौन्दर्य्य-राशि निकल निकलकर चारों ओर फैल रही है। अहा ! जिनके विशाल भाल पर सिन्दूर-रञ्जित मोतियों की पंक्ति शोभायमान् है और दन्त पंक्ति कुन्द-कलियों को भी लज्जित कर रही है । वही धन्य हैं जो ऐसी श्रीप्रियाजी के भावना परायण हैं।

