कामी के मन काम, दाम ज्यौं रंकहि भावै ।
नवल कुंवरि-पद-प्रीती सु, अलबेलिअलि पावै ॥
- श्री अलबेली अलि, विनय कुंडलियाँ (7)
जिस प्रकार घोर कामी व्यक्ति को काम प्रिय होता है, एवं रंक को धन प्रिय है, हे नवल-किशोरी राधिका! कृपा कर ऐसी प्रीति मुझे भी आपके चरण-कमलों में प्रदान कीजिए।
नवल कुंवरि-पद-प्रीती सु, अलबेलिअलि पावै ॥
- श्री अलबेली अलि, विनय कुंडलियाँ (7)
जिस प्रकार घोर कामी व्यक्ति को काम प्रिय होता है, एवं रंक को धन प्रिय है, हे नवल-किशोरी राधिका! कृपा कर ऐसी प्रीति मुझे भी आपके चरण-कमलों में प्रदान कीजिए।

