बनी है नीकी राधा माधव जोरी - श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी की वाणी (75)

बनी है नीकी राधा माधव जोरी - श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी की वाणी (75)

बनी है नीकी राधा माधव जोरी ।
गौर स्याम तन नील पीट पट वारौं रति मदन करोरी ।। [1]
निरखि निरखि छबि जीजै री सजनी इनकी पटतर कोरी ।
गोबिंदसरन सोभा संपति लखि कहा बरनौं मति थोरी ।। [2]

- श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी, श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी की वाणी (75)

श्री राधा माधव की यह दिव्य गौर श्याम वर्ण जोड़ी कितनी नीकी [सुंदर] बनी है जिनके तन पर नील पीट वस्त्र सुशोभित है जिसकी शोभा को देखकर कोटि कोटि रति कामदेव को नयौछावर किया जा सकता है । [1]

हे सखी, इनको निरख निरख कर ही अपना जीवन व्यतीत कर जिसकी उपमा किससे की जाए? श्री गोविंद शरण देवाचार्य कहते हैं कि अगाध शोभा के समुद्र श्री श्यामा श्यामा का वर्णन करना मेरी अत्यंत थोड़ी बुद्धि के लिए असंभव सा है । [2]