(राग कल्यान)
कुंजबिहारी नाचत नीके; लाड़िली नचावति नीके।
औघर ताल धरै श्रीस्यामा ताताथेई
ताताथेई गावति संग पी के॥ [1]
तांडव लास और अंग को गनें जे जे रुचि उपजति जी के।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कौ मेरु
सरस भयौ और रस गुनी परे फीके॥ [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (60)
श्री कुंजबिहारी [श्री कृष्ण] सुंदर नृत्य कर रहे हैं, श्री राधिका उन्हें सुन्दर ढंग से नृत्य करा रही हैं।
श्री बिहारीजी और उनकी प्रिया श्री राधिका दोनों ही सुर-ताल को पूर्ण धारण कर 'ताताथेई ताताथेई' गा रहे हैं । [1]
श्रीराधा बीच-बीच में सरस रस भरी मान भरे वचन बोल रही हैं, वे दोनों एक दूसरे के अंगों को स्पर्श करते हुए नृत्य कर रहे हैं। उनके ह्रदय से उत्पन्न होने वाली नृत्य की विभिन्न गतियों की गणना कौन कर सकता है।
स्वामी श्री हरिदास जी कहते हैं, "ये दोनों मधुर रस की वर्षा कर रहे हैं, वैसे तो श्री बिहारीजी जी सभी गुणों में प्रवीण, विज्ञ, ज्ञाता हैं, परंतु वह रसीली श्री राधा ज़ू के समक्ष फीके फीके लगते हैं ।" [2]
कुंजबिहारी नाचत नीके; लाड़िली नचावति नीके।
औघर ताल धरै श्रीस्यामा ताताथेई
ताताथेई गावति संग पी के॥ [1]
तांडव लास और अंग को गनें जे जे रुचि उपजति जी के।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कौ मेरु
सरस भयौ और रस गुनी परे फीके॥ [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (60)
श्री कुंजबिहारी [श्री कृष्ण] सुंदर नृत्य कर रहे हैं, श्री राधिका उन्हें सुन्दर ढंग से नृत्य करा रही हैं।
श्री बिहारीजी और उनकी प्रिया श्री राधिका दोनों ही सुर-ताल को पूर्ण धारण कर 'ताताथेई ताताथेई' गा रहे हैं । [1]
श्रीराधा बीच-बीच में सरस रस भरी मान भरे वचन बोल रही हैं, वे दोनों एक दूसरे के अंगों को स्पर्श करते हुए नृत्य कर रहे हैं। उनके ह्रदय से उत्पन्न होने वाली नृत्य की विभिन्न गतियों की गणना कौन कर सकता है।
स्वामी श्री हरिदास जी कहते हैं, "ये दोनों मधुर रस की वर्षा कर रहे हैं, वैसे तो श्री बिहारीजी जी सभी गुणों में प्रवीण, विज्ञ, ज्ञाता हैं, परंतु वह रसीली श्री राधा ज़ू के समक्ष फीके फीके लगते हैं ।" [2]

