शाखोपरिष्ठा इह चन्द्रलेखा, भवेद्यथोक्तिः परमल्पदृष्टेः।
इयं प्रबोधाय भवेत्तथोक्तिः, कृष्णात्परा त्वं वृषभानुकन्ये॥
- श्री वंशी अलि, श्री राधा स्तोत्र (8)
जैसे किसी अत्यंत अल्प दृष्टि वाले व्यक्ति को यह कहकर कि “देखो उस वृक्ष की शाखा के ऊपर चंद्रमा दिखाई दे रहा है, संकेत से चंद्रमा का बोध कराते हैं” । उसी प्रकार “श्री कृष्ण के भी जो परे तत्व हैं वहीं राधा हैं" वह बतलाया जाता है।
इयं प्रबोधाय भवेत्तथोक्तिः, कृष्णात्परा त्वं वृषभानुकन्ये॥
- श्री वंशी अलि, श्री राधा स्तोत्र (8)
जैसे किसी अत्यंत अल्प दृष्टि वाले व्यक्ति को यह कहकर कि “देखो उस वृक्ष की शाखा के ऊपर चंद्रमा दिखाई दे रहा है, संकेत से चंद्रमा का बोध कराते हैं” । उसी प्रकार “श्री कृष्ण के भी जो परे तत्व हैं वहीं राधा हैं" वह बतलाया जाता है।

