काहू को भरोसो वेद चारो जो पड़ै होत - ताज बीबी

काहू को भरोसो वेद चारो जो पड़ै होत - ताज बीबी

काहू को भरोसो वेद चारो जो पड़ै होत,
काहू को भरोसो गंगा न्हाये सहस्र धार को। [1]
काहू को भरोसो सब देवन के पूजे 'ताज',
काहू को भरोसो विधि शंकर उदार को॥ [2]
काहू को भरोसो मनि पाये मिले पारस को,
काहू को भरोसो सूर बीरन के लार को। [3]
तारन वे तरन कृष्ण सुने जो जहान बीच,
मोको तो भरोसो एक नन्द के कुमार को॥ [4]

- ताज बीबी

किसी को चारों वेदों के स्वाध्याय पर ही भरोसा है, तो किसी को गंगा स्नान करने पर। [1]

किसी को देवताओं की उपासना का सहारा है, तो कोई ब्रह्मा और भगवान शंकर की आराधना में विश्वास करता है। [2]

किसी को पारस मणि का आसरा है अर्थात धन का अवलंब है तो किसी को वीरता एवं शौर्य पर भरोसा है। [3]

ताज बेगम कहतीं हैं "मुझे तो केवल नंदनंदन श्री कृष्ण का ही भरोसा है, जो इस संसार सागर से पार लगाने वाले शरणागत वत्सल जहाज हैं।" [4]