जग लक्ष्मी सेवत जु, वह सेवत हरि के पाय।
सो हरि राधा पगनी नित, जावक देत बनाय॥
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, ब्रज सार (22)
पूरा संसार लक्ष्मी जी की सेवा करता है, वही लक्ष्मी जी श्री हरि के चरणों की सेवा करती हैं, और वही श्री हरि नित्य श्री राधा के चरणों की सेवा कर उनके चरणों में जावक लगाते हैं— श्री राधा की महिमा अपरम्पार है।।
सो हरि राधा पगनी नित, जावक देत बनाय॥
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, ब्रज सार (22)
पूरा संसार लक्ष्मी जी की सेवा करता है, वही लक्ष्मी जी श्री हरि के चरणों की सेवा करती हैं, और वही श्री हरि नित्य श्री राधा के चरणों की सेवा कर उनके चरणों में जावक लगाते हैं— श्री राधा की महिमा अपरम्पार है।।

