ब्रज के श्वपच बड़े बड़भागी - श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर

ब्रज के श्वपच बड़े बड़भागी - श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर

ब्रज के श्वपच बड़े बड़भागी ।
जा रजकों ब्रह्मादिक तरसें सो इन अंगन लागी ।। [1]
महाप्रसाद नित्यप्रति पावत तातें अति अनुरागी ।
परमानन्द कहाँ लौं वरनौं प्रेमभक्ति रसपागी ।। [2]

- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर

ब्रज के स्वपच अत्यंत बड़भागी जन है क्योंकि इनके अंगों में नित्य ही वह ब्रज रज लगी रहती है जिस रज को साक्षात ब्रह्मादिक देवता भी तरसते हैं। [1]

वह नित्य ही महाप्रसाद पाते हैं जिससे उनका विशेष अनुराग है। श्री परमानंद दास जी कहते हैं कि ऐसे बड़भागी जनों का मैं वर्णन कहां तक करूं, यह जन प्रेम भक्ति रस में उन्मत्त रहते हैं । [2]