तुमरे कारण सब सुख छोड़यो - श्री मीरा जी

तुमरे कारण सब सुख छोड़यो - श्री मीरा जी

तुमरे कारण सब सुख छोड़यो अब मोहि क्यों तरसावो हो।
विरह विथा लागी उर अंतर सो तुम आय बुझावो हो॥ [1]
अब छोड़त नहीं बणे प्रभुजी, हंस कर तुरत बुलावो हो।
मीरा दासी जनम जनम की, अंग से अंग लगावो हो॥ [2]

- श्री मीरा जी

श्री मीरा जी कहती हैं "हे प्रभु, मैंने आपके लिए ही समस्त सुखों का त्याग कर दिया है, अब मुझे आप क्यों तरसाते हो। मेरा ह्रदय आपके वियोग से संतप्त हो रहा है, इसलिए कृपा कर आकर मेरे ह्रदय को शीतलता प्रदान करो।" [1]

मेरे ह्रदय में केवल आपही विराजमान हैं, मैं आपको छोड़ नहीं सकती, इसलिए कृपया मुझे हंस कर तुरन्त अपने पास बुला लीजिये। श्री मीरा जी कह रही हैं "हे प्रभु, मैं आपकी जनम-जनम की दासी हूँ, मुझे अपने ह्रदय से लगा लीजिये।" [2]