जयति स्याम-स्वामिनि परम निरमल रस की खान - श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (8.2)

जयति स्याम-स्वामिनि परम निरमल रस की खान - श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (8.2)

जयति स्याम-स्वामिनि परम, निरमल रस की खान।
जिन पद बलि-बलि जात नित, माधव प्रेम-निधान॥

- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (8.2)

श्यामसुन्दर की स्वामिनि, श्री राधा की जय हो, जो निर्मल प्रेम-रस की खान हैं और जिनके चरणों पर प्रेम के निधान श्री माधव (श्री कृष्ण) नित्य ही बलिहारी जाते हैं।