मेरी राधा रानी ब्रजरस की खानी,
ठाकुरहूँ की हैं ठकुरानी । [1]
मेरी राधारानी सँग सारँगपानी,
विहरत वृंदावन राजधानी। [2]
मेरी राधारानी सम मेरी राधारानी,
जेहि सेवत उमा रमा बानी । [3]
मेरी राधारानी हैं ब्रज महरानी,
जाकर कर श्यामहुँ अगवानी । [4]
राधा रानी की हूँ मैं, मेरी राधारानी,
ध्यावूँ हौं कृपालु नित राधारानी। [5]
राधा रानी की हूँ मैं, मेरी राधारानी,
ध्यावूँ हौं कृपालु नित राधारानी। [5]
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (78)
मेरी राधारानी ब्रज रस की खान हैं। वह परम ठाकुर जी [श्री कृष्ण] की भी ठकुरानी हैं। [1]
मेरी राधारानी नित्य ही श्री कृष्ण संग उनकी राजधानी श्री वृंदावन धाम में नित्य विहार करती हैं । [2]
मेरी राधारानी के समान केवल मेरी राधारानी हैं जिनकी सेवा पार्वती, लक्ष्मी एवं सरस्वती आदि करती हैं। [3]
मेरी राधारानी ब्रज की सर्वोच्च महारानी हैं; भगवान कृष्ण भी उनका स्वागत करने के लिए आगे आते हैं। [4]
श्री कृपालूजी महाराज कहते हैं कि मैं राधा रानी की हूँ और वो मेरी हैं, मेरी यही इच्छा है की नित्य ही कृपालु राधा रानी का ही स्मरण करता रहूँ । [5]
श्री कृपालूजी महाराज कहते हैं कि मैं राधा रानी की हूँ और वो मेरी हैं, मेरी यही इच्छा है की नित्य ही कृपालु राधा रानी का ही स्मरण करता रहूँ । [5]

