जपौ मन राधा राधा नाम - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (36)

जपौ मन राधा राधा नाम - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (36)

(राग कल्याण त्रिताल)
जपौ मन राधा राधा नाम ।
जीवन अब तो वृथा जात है, करलो ये इक काम ।। [1]
राघा नाम जपत हैं जो जन, संग रहे घनश्याम ।
सखियन नाम ये प्राण भावतो, सुखदायक अभिराम ।। [2]
दर-दर-दर भटको जिन प्यारे, बस वृन्दावन धाम ।
श्रीगोपालहित नाम प्राणधन, सुन्दर सुखद ललाम ।। [3]

- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (36)

अरे मन तेरा जीवन वृथा [बर्बाद] जा रहा है, बस तू अब एक ही काम कर: श्री राधा राधा नाम का नित्य ही जप कर । [1]

जो जन राधा नाम का जप करते हैं उनके संग नित्य ही भगवान श्यामसुंदर रहते हैं । सखियों के लिए यह दिव्य “राधा" नाम प्राणों के समान है एवं अनंत सुखदायक अभिराम है । [2]

अरे प्यारे, क्यूँ तू दर दर भटकता फिर रहा है, क्यूँ अब तू वृंदावन धाम में नहीं बस रहा? श्री हित गोपाल दास जी कहते हैं कि यह “राधा” नाम ही उनका प्राणधन है जो सुंदर, सुखद एवं ललाम है । [3]