अचरज धाम नाम वृन्दावन, रसमय सृष्टि जहाँ है - श्री वृंदावन दास चाचा जी,  युगल स्नेह पत्रिका (60)

अचरज धाम नाम वृन्दावन, रसमय सृष्टि जहाँ है - श्री वृंदावन दास चाचा जी, युगल स्नेह पत्रिका (60)

अचरज धाम नाम वृन्दावन,
रसमय सृष्टि जहाँ है । [1]
अचरज गौर श्याम रस भोगी,
सन्तत सदा तहाँ है ।। [2]
अचरज रूप सहेली जे,
दम्पति सेवा सुख चाहैं । [3]
वृन्दावन हित रूप अलौकिक,
यह सुख अनत कहाँ है ।। [4]

- चाचा श्री हित वृंदावन दास, श्रीयुगल सनेह पत्रिका (60)

श्रीवृन्दावन नामक एक आश्चर्यमय धाम है, जहाँ रसमय सृष्टि है। [1]

इस वृन्दावन में रसभोगी आश्चर्यमय श्रीगौर-श्याम निरन्तर निवास करते हैं । [2]

यहाँ सखियों का भी आश्चर्यमय रूप है कि दम्पति श्रीराधावल्लभलालजी की सेवा का सुख चाहती हैं। [3]

श्री चाचा हित श्रीवृन्दावनदासजी कहते हैं कि यह वृन्दावन हितरूप है, अलौकिक है। यह सुख अन्यत्र कहाँ मिल सकता है ? [4]