मन गज तजि कै विषै मग, चलहु भजन रस माहि ।
श्री राधावल्लभ लाल बिनु, तेरौ कोऊ नाहिं ॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (6)
हे मन रूपी हाथी! विषयों (संसारिक भोगों) के मार्ग को छोड़कर अब युगल किशोर के रसमय भजन मार्ग पर चल। श्री राधावल्लभ लाल के बिना तेरा इस संसार में कोई भी अपना नहीं है।
श्री राधावल्लभ लाल बिनु, तेरौ कोऊ नाहिं ॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (6)
हे मन रूपी हाथी! विषयों (संसारिक भोगों) के मार्ग को छोड़कर अब युगल किशोर के रसमय भजन मार्ग पर चल। श्री राधावल्लभ लाल के बिना तेरा इस संसार में कोई भी अपना नहीं है।

