अब कब कृपा करोगी स्वामिनी - श्री किशोर दास, श्री किशोर दास जी की वाणी, नेह तरंग (47)

अब कब कृपा करोगी स्वामिनी - श्री किशोर दास, श्री किशोर दास जी की वाणी, नेह तरंग (47)

(राग कान्हरा)
अब कब कृपा करोगी स्वामिनी ।
नित्य-निकुंज बिहारिन स्यामा श्रीमत श्रीराधे नामिनी ।। [1]
स्वयं प्रकास सरस सुखसागर नागरि वृंदावन धामिनी ।
श्री दास किसोर वोर करि चितवनि प्रीतम प्रान भवन भामिनी ।। [2]
- श्री किशोर दास, श्री किशोर दास जी की वाणी, नेह तरंग (47)

हे स्वामिनी, जो नित्य निकुंजों में नित्य विहार पारायण हैं, जिनका नाम “श्री राधे है", हे श्यामा! आप मुझ पर कब कृपा करोगी? [1]

श्री किशोर दास कहते हैं, हे नागरी जी, आप सरस सुख की सागर हैं, वृंदावन धाम की निवासनी हैं, प्रियतम की प्राण हैं, हे भामिनी! आप कब अपनी कृपा की नेकु दृष्टि मेरे ऊपर डालोगी? [2]