हा राधे प्राण कोटिभ्योऽप्यति प्रेष्ठ पदाम्बुजे ।
तव सेवां विना नैव क्षणं जीवितुमुत्सहे ।।
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (10)
हा राधिके ! मुझे आपके श्रीचरण-कमल अपने कोटि कोटि प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं। आपकी चरण-सेवा के बिना मेरा क्षण भर का भी जीवन कठिन है। [मैं उसे कैसे धारण करूँ ?]
तव सेवां विना नैव क्षणं जीवितुमुत्सहे ।।
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (10)
हा राधिके ! मुझे आपके श्रीचरण-कमल अपने कोटि कोटि प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं। आपकी चरण-सेवा के बिना मेरा क्षण भर का भी जीवन कठिन है। [मैं उसे कैसे धारण करूँ ?]

