व्यास स्वपच बहु तरिगए, एक नाम लवलीन ।
चड़े नाव अभिमान की, बूड़े बहुत कुलीन ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (47)
व्यासजी कहते हैं कि जो नाम-सुमिरन में लवलीन हुए, वे चांडाल (स्वपच) भी इस संसार-सागर से पार उतर गए। किंतु जो लोग अभिमान की नाव पर सवार हुए, वे बड़े-बड़े कुलीन (उच्च कुल के) भी डूब गए।
चड़े नाव अभिमान की, बूड़े बहुत कुलीन ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (47)
व्यासजी कहते हैं कि जो नाम-सुमिरन में लवलीन हुए, वे चांडाल (स्वपच) भी इस संसार-सागर से पार उतर गए। किंतु जो लोग अभिमान की नाव पर सवार हुए, वे बड़े-बड़े कुलीन (उच्च कुल के) भी डूब गए।

