अब तो कृपा करो व्रजवासी ।
जुग जुग मधि हो सखा श्याम के लीला ललित उपासी ॥
काम न और पुनीत ठौर सौं गंग गया कहा कासी ।
नागरिया पैं करुणा करि कैं करियैं घोष निवासी ॥
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (98)
हे ब्रज वासी जन, अब मुझपर कृपा कीजिए । आप सब तो जुगों जुगों से श्री श्यामसुंदर के सखा हो और उनकी लीला की उपासी हो । [1]
मेरा अन्य किसी पवित्र स्थल से कोई काम नहीं है चाहे वो गंगा, गया एवं काशी ही क्यूँ न हो । श्री नागरीदास जी कहते हैं कि अब मुझपर कृपा कर मुझे ब्रज का निवासी बना दीजिए । [2]

