निबद्धमूर्द्धाञ्जलिरेष याचे नीरन्ध्र-दैन्योन्नति- मुक्तकण्ठम्।
दयाम्बुधे देव भवत्कटाक्ष-दाक्षिण्यलेशेन सकृन्निषिञ्च।।
- श्री बिल्वमंगल, श्री कृष्ण कर्णामृतम (30)
हे श्रीकृष्ण ! मस्तक पर हाथों की अंजलि बाँधकर निरन्तर दीनता की उन्नति से मुक्त कण्ठ से मैं तुम से याचना करता हूँ । हे दयासागर! तुम अपने कटाक्षों की उदारता के एक कण से भी एक बार मुझे सींच दो ।
दयाम्बुधे देव भवत्कटाक्ष-दाक्षिण्यलेशेन सकृन्निषिञ्च।।
- श्री बिल्वमंगल, श्री कृष्ण कर्णामृतम (30)
हे श्रीकृष्ण ! मस्तक पर हाथों की अंजलि बाँधकर निरन्तर दीनता की उन्नति से मुक्त कण्ठ से मैं तुम से याचना करता हूँ । हे दयासागर! तुम अपने कटाक्षों की उदारता के एक कण से भी एक बार मुझे सींच दो ।

