काहू को भरोसो बद्रीनाथ जाय पाँय परे,
काहू को भरोसो जगन्नाथ जू के भात को। [1]
काहू को भरोसो काशी गया मे ही पिण्ड भरै,
काहू को भरोसो प्रात देखे बट पात को॥ [2]
काहू को भरोसो सेतबन्ध जाय पूजा करै,
काहू को भरोसो द्वारावती गये जात को। [3]
काहू को भरोसो 'ताज' पुष्कर में दान किए,
मोको तो भरोसो एक नन्द जू के लाल को॥ [4]
- ताज बीबी
किसी को बद्रीनाथ धाम पर भरोसा है, किसी को श्री जगन्नाथ जी के प्रसाद पर भरोसा है। [1]
किसी को काशी में पिंड दान करने पर भरोसा है, किसी को सवेरे उठ कर वट वृक्ष के दर्शन करने पर ही भरोसा है। [2]
किसी को सेतुबंध में जाकर भगवान रामेश्वर की पूजा करने पर ही भरोसा है, और किसी को द्वारका जाने पर भरोसा है। [3]
श्री ताज बीबी कहती हैं कि किसी को भरोसा पुष्कर में दान करने पर है, परंतु मुझे तो एक मात्र भरोसा श्री नंद जी के लाल भगवान कृष्ण पर ही है। [4]
काहू को भरोसो जगन्नाथ जू के भात को। [1]
काहू को भरोसो काशी गया मे ही पिण्ड भरै,
काहू को भरोसो प्रात देखे बट पात को॥ [2]
काहू को भरोसो सेतबन्ध जाय पूजा करै,
काहू को भरोसो द्वारावती गये जात को। [3]
काहू को भरोसो 'ताज' पुष्कर में दान किए,
मोको तो भरोसो एक नन्द जू के लाल को॥ [4]
- ताज बीबी
किसी को बद्रीनाथ धाम पर भरोसा है, किसी को श्री जगन्नाथ जी के प्रसाद पर भरोसा है। [1]
किसी को काशी में पिंड दान करने पर भरोसा है, किसी को सवेरे उठ कर वट वृक्ष के दर्शन करने पर ही भरोसा है। [2]
किसी को सेतुबंध में जाकर भगवान रामेश्वर की पूजा करने पर ही भरोसा है, और किसी को द्वारका जाने पर भरोसा है। [3]
श्री ताज बीबी कहती हैं कि किसी को भरोसा पुष्कर में दान करने पर है, परंतु मुझे तो एक मात्र भरोसा श्री नंद जी के लाल भगवान कृष्ण पर ही है। [4]

