यस्याः पदरसानन्दा कोटयं शेनापि नो समाः ।
सर्व प्रेमानन्द-रसाः सैव त्वं स्वामिनी मम ॥
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (9)
जिनके पद-रस के कोट्यांश आनन्द के तुल्य अन्य सब मिलकर भी नहीं हैं। वह सर्व-प्रेमानन्द-रसं-स्वरूपा [श्रीराधा] ही मेरी स्वामिनी हैं ।
सर्व प्रेमानन्द-रसाः सैव त्वं स्वामिनी मम ॥
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (9)
जिनके पद-रस के कोट्यांश आनन्द के तुल्य अन्य सब मिलकर भी नहीं हैं। वह सर्व-प्रेमानन्द-रसं-स्वरूपा [श्रीराधा] ही मेरी स्वामिनी हैं ।

