शोभा नवल निकुंज की - श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (27)

शोभा नवल निकुंज की - श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (27)

शोभा नवल निकुंज की, क़हत बने नहिं बैन ।
कै जाने मन की दशा, कै माधुरि कै नैन ॥
- श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (27)
 
वृन्दावन में वंशीवट के नवल-निकुंज की शोभा का वर्णन वाणी से करना असम्भव है। उसे अनुभव करने के लिए मन का भक्ति से और नेत्रों का माधुर्य से पूर्णतः ओत-प्रोत होना आवश्यक है।