(राग कान्हरौ)
राधा मोहन करत वियारू ।
एक कर थार सवारें सुंदरि एक वेष एक रूप उज्यारी ।। [1]
मधु मेवा पकवान मिठाई दंपति अति रुचि कारी ।
सूरदास को जूँठन दीनी अति प्रसन्न ललिता री ।। [2]
- श्री सूरदास, सूर सागर
दिव्य युगल श्री राधा कृष्ण एक साथ भोजन कर रहे हैं। ब्रज की सुंदर युवतियां एक ही थाली में उनको खाना परोस रही हैं । उन्होंने एक जैसे कपड़े पहने हैं और उनका रूप भी एक जैसा दिखता है। [1]
स्वादिष्ट फल, मेवा, मिठाई और अन्य पकवान दिव्य दंपत्ति को बहुत रुचिकर हैं। श्री सूरदास कहते हैं कि श्री ललिताजी उनके बचे जूँठन को प्राप्त कर अत्यंत प्रसन्नता से उन्हें दे रही हैं । [2]
राधा मोहन करत वियारू ।
एक कर थार सवारें सुंदरि एक वेष एक रूप उज्यारी ।। [1]
मधु मेवा पकवान मिठाई दंपति अति रुचि कारी ।
सूरदास को जूँठन दीनी अति प्रसन्न ललिता री ।। [2]
- श्री सूरदास, सूर सागर
दिव्य युगल श्री राधा कृष्ण एक साथ भोजन कर रहे हैं। ब्रज की सुंदर युवतियां एक ही थाली में उनको खाना परोस रही हैं । उन्होंने एक जैसे कपड़े पहने हैं और उनका रूप भी एक जैसा दिखता है। [1]
स्वादिष्ट फल, मेवा, मिठाई और अन्य पकवान दिव्य दंपत्ति को बहुत रुचिकर हैं। श्री सूरदास कहते हैं कि श्री ललिताजी उनके बचे जूँठन को प्राप्त कर अत्यंत प्रसन्नता से उन्हें दे रही हैं । [2]

