अहो कुँवरि बर लाड़िली, करुणा सिंधु अपार ।
तुम बिन नहिं मेरौ कोऊ, कहूँ पुकार पुकार॥
- श्री अलबेली अलि, विनय कुंडलियाँ (4)
हे अपार करुणा-सिन्धु लाड़िली श्री राधा! मैं बार-बार पुकार कर यही कहता हूँ कि आपके अतिरिक्त मेरा कोई नहीं है; आप ही मेरा एकमात्र आश्रय हैं।
तुम बिन नहिं मेरौ कोऊ, कहूँ पुकार पुकार॥
- श्री अलबेली अलि, विनय कुंडलियाँ (4)
हे अपार करुणा-सिन्धु लाड़िली श्री राधा! मैं बार-बार पुकार कर यही कहता हूँ कि आपके अतिरिक्त मेरा कोई नहीं है; आप ही मेरा एकमात्र आश्रय हैं।

