श्री राधा आराध्य हमारी ।
श्री वृंदावन सी रजधानी, पाये नीके कुंजबिहारी ।। [1]
बहनापौ ललितादि अलिन सौं, बाँह गही बंसी सहचारी ।
अपनी जानि किशोरी जू नैं, करि लीनी सब भाँति सुखारी ।। [2]
- श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (58)
श्री राधा ही हमारी आराध्य हैं । हमारी राजधानी वृंदावन है जहां हमें सुंदर कुंज बिहारी का संग प्राप्त है । [1]
श्री ललिता इत्यादि से हमारा बहन के समान संबंध है एवं हमारी बाँह श्री बंशी सहचरी ने पकड़ रखी है । श्री किशोरी अलि कहते हैं कि श्री किशोरी जी ने हमें अपना जान कर समस्त प्रकार से सुख प्रदान किया है । [2]
श्री वृंदावन सी रजधानी, पाये नीके कुंजबिहारी ।। [1]
बहनापौ ललितादि अलिन सौं, बाँह गही बंसी सहचारी ।
अपनी जानि किशोरी जू नैं, करि लीनी सब भाँति सुखारी ।। [2]
- श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (58)
श्री राधा ही हमारी आराध्य हैं । हमारी राजधानी वृंदावन है जहां हमें सुंदर कुंज बिहारी का संग प्राप्त है । [1]
श्री ललिता इत्यादि से हमारा बहन के समान संबंध है एवं हमारी बाँह श्री बंशी सहचरी ने पकड़ रखी है । श्री किशोरी अलि कहते हैं कि श्री किशोरी जी ने हमें अपना जान कर समस्त प्रकार से सुख प्रदान किया है । [2]

