(राग जिला)
वृन्दावन सुख लूटैंगे हम वृन्दावन सुख लूटैंगे ।
ललित लता कुंजन के नीचे रसिकन सो जा जूटैंगे ।। [1]
छके रहे छवि ललित माधुरी लीला रस गुण गूटैंगे ।
ललित लड़ैती युगल इश्क में नैन डिये के खूटैंगे ।। [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (36)
हम वृंदावन जाकर वृंदावन का सुख खूब लूटेंगे। श्री वृंदावन धाम की ललित कुंजों के नीचे रसिकों का संग करेंगे। [1]
वृंदावन में श्री युगल सरकार श्री राधा कृष्ण की ललित माधुरी की छवि में नित्य ही छके रहेंगे, एवं लीला रस एवं गुण का पान करेंगे । श्री ललित लड़ैती जी कहते हैं कि युगल के प्रेम में उन्मत्त होकर नित्य ही अपने नयनों से निहारेंगे । [2]
वृन्दावन सुख लूटैंगे हम वृन्दावन सुख लूटैंगे ।
ललित लता कुंजन के नीचे रसिकन सो जा जूटैंगे ।। [1]
छके रहे छवि ललित माधुरी लीला रस गुण गूटैंगे ।
ललित लड़ैती युगल इश्क में नैन डिये के खूटैंगे ।। [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (36)
हम वृंदावन जाकर वृंदावन का सुख खूब लूटेंगे। श्री वृंदावन धाम की ललित कुंजों के नीचे रसिकों का संग करेंगे। [1]
वृंदावन में श्री युगल सरकार श्री राधा कृष्ण की ललित माधुरी की छवि में नित्य ही छके रहेंगे, एवं लीला रस एवं गुण का पान करेंगे । श्री ललित लड़ैती जी कहते हैं कि युगल के प्रेम में उन्मत्त होकर नित्य ही अपने नयनों से निहारेंगे । [2]

