सरि कौन करै मेरी प्यारी की ।
जाको रूप रूप कों मोहै पालक न लगै बिहारी की ।। [1]
अद्भुत प्रीति देखैं बनि आवै तन मन अति हितकारी की ।
श्रीकुंजबिहारिनि ललित लाडिली जीवनि प्रान हमारी की ।। [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रिंगार रस के पद (56)
मेरी प्यारी श्री राधिका की समानता कौन कर सकता है? जिनका रूप सौंदर्य साक्षात रूप को भी मोहित कर लेता है; जिन्हें श्री बांके बिहारी [भगवान कृष्ण] अपलक नेत्रों से निहारते रहते हैं। [1]
जिनकी प्रीति अद्बुत है एवं देखते ही बनती है जिसे शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता है; जिनका तन मन अति हितकारी है । श्री ललित किशोरी देव जी कहते हैं कि श्री कृष्ण [ललित ठाकुर] की लाडिली श्री कुंज बिहारिनि श्री राधिका ही मेरी एक मात्र जीवन की प्राण हैं। [2]
जाको रूप रूप कों मोहै पालक न लगै बिहारी की ।। [1]
अद्भुत प्रीति देखैं बनि आवै तन मन अति हितकारी की ।
श्रीकुंजबिहारिनि ललित लाडिली जीवनि प्रान हमारी की ।। [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रिंगार रस के पद (56)
मेरी प्यारी श्री राधिका की समानता कौन कर सकता है? जिनका रूप सौंदर्य साक्षात रूप को भी मोहित कर लेता है; जिन्हें श्री बांके बिहारी [भगवान कृष्ण] अपलक नेत्रों से निहारते रहते हैं। [1]
जिनकी प्रीति अद्बुत है एवं देखते ही बनती है जिसे शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता है; जिनका तन मन अति हितकारी है । श्री ललित किशोरी देव जी कहते हैं कि श्री कृष्ण [ललित ठाकुर] की लाडिली श्री कुंज बिहारिनि श्री राधिका ही मेरी एक मात्र जीवन की प्राण हैं। [2]

