राधाकृष्णेति हे गोप ये जपन्ति पुन: पुन: ।
चतुष्पदार्थं किं तेषां साक्षात् कृष्णोअपि लभ्यते ।।
- गर्ग संहिता, गोलोक खंड (15.71)
जो मनुष्य श्री “राधा कृष्ण” यह बारम्बार रटता है उन को चारों पदार्थ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का क्या कहना साक्षात श्री कृष्ण चंद्र भगवान ही मिल जाते हैं ।
चतुष्पदार्थं किं तेषां साक्षात् कृष्णोअपि लभ्यते ।।
- गर्ग संहिता, गोलोक खंड (15.71)
जो मनुष्य श्री “राधा कृष्ण” यह बारम्बार रटता है उन को चारों पदार्थ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का क्या कहना साक्षात श्री कृष्ण चंद्र भगवान ही मिल जाते हैं ।

