मेरौ एक श्री बृंदाबिपिन सहारौ - श्रीराधा प्रिया जी (राधिकानाथ जी)

मेरौ एक श्री बृंदाबिपिन सहारौ - श्रीराधा प्रिया जी (राधिकानाथ जी)

मेरौ एक श्री बृंदाबिपिन सहारौ ।
ललित लता कुजन की छया, जब ही नैन पसारौ ॥ [1]
श्री राधामाधव दर्शन होय, जो है नैनन तारौ ।
श्री जमना जल पान करन कूं, जो कहुँ नैक विचारौ ॥ [2]
नित्यकेलि दरसन अनुपम छवि, मिट जाय मोह अँध्यारौ ।
'श्री राधा प्रिया' बसहु दृढ़ व्रत करि, जो चाहो सुख भारौ ॥ [3]

- श्रीराधा प्रिया जी (राधिकानाथ जी)

मेरा सहारा तो एक मात्र श्री वृंदावन धाम है जहां नित्य ही सुंदर ललित लता कुंजों की छाया विद्यमान रहती है । [1]

जहां नित्य ही श्री श्यामा श्याम के दर्शन होते हैं जो हमारे नैनों के तारे हैं । जब भी हृदय में इच्छा उत्पन्न होती है तो श्री यमुना जी का जल पान कर सकते हैं । [2]

जहां श्री श्यामा श्याम की नित्य केली के अनुपम दर्शन होते हैं जिसे निहार कर हृदय से मोह के अंधकार का नाश हो जाता है । श्री राधिका नाथ जी कहते हैं कि यदि किसी जीव को बहुत भारी [नित्य] सुख की तलाश हो तो वह दृढ़ व्रत कर वृंदावन वास करे । [3]