जग्य दान संजम नियम - श्री नागरीदास जी की वाणी, रसिक रत्नावली (14)

जग्य दान संजम नियम - श्री नागरीदास जी की वाणी, रसिक रत्नावली (14)

जग्य दान संजम नियम, किए तीरथ तप पूर ।
नेह नीर परस्यौ नहीं, तो सब कीनौं धूर॥

- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, रसिक रत्नावली (14)

यदि कोई मनुष्य यज्ञ, दान, संयम, नियम, तीर्थ-भ्रमण और तप आदि सब कर ले, परंतु श्री राधा-कृष्ण के प्रेम में विभोर होकर निष्काम आँसू न बहाए, तो उसका सारा साधन धूल के समान व्यर्थ है।