बंसी वारे मोहना, बंसी तनक बजाय।
तेरौ बंसी मन हर्यौ, घर आँगन न सुहाय॥
- ब्रज के दोहे
हे बंसीवाले श्यामसुन्दर! हमें भी अपनी मधुर बंसी की तान सुना दो। तुम्हारी बंसी की ध्वनि ने हमारे मन को ऐसा मोहित कर लिया है कि अब हमें अपना घर-आँगन भी अच्छा नहीं लगता।
तेरौ बंसी मन हर्यौ, घर आँगन न सुहाय॥
- ब्रज के दोहे
हे बंसीवाले श्यामसुन्दर! हमें भी अपनी मधुर बंसी की तान सुना दो। तुम्हारी बंसी की ध्वनि ने हमारे मन को ऐसा मोहित कर लिया है कि अब हमें अपना घर-आँगन भी अच्छा नहीं लगता।

