तुम आओ न आओ तुम्हारी रजा - श्री हरे कृष्ण जी

तुम आओ न आओ तुम्हारी रजा - श्री हरे कृष्ण जी

(सवैया)
तुम आओ न आओ तुम्हारी रजा, तुम्हें आनाहि होगा कभी न कभी। [1]
यदि भक्त हैं प्यारे तुझे प्रभु तो, हँस जानाहि होगा कभी न कभी॥ [2]
‘हरे कृष्ण’ मेरे उलझे मन को, सुलझानाहि होगा कभी न कभी। [3]
यह रूप अनूप दया करके, दिखलाना हि होगा कभी न कभी॥ [4]

- श्री हरे कृष्ण जी

हे प्रियतम श्रीकृष्ण! तुम अभी आओ या न आओ, यह तुम्हारी इच्छा पर निर्भर है, परंतु एक दिन तो तुम्हें अवश्य आना ही होगा। [1]

हे प्रभु, यदि तुम्हारे भक्त वास्तव में तुम्हें प्रिय हैं, तो निश्चय ही किसी दिन तुम हम पर प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाओगे। [2]

हे प्यारे श्यामसुंदर! कभी न कभी तो तुम्हें मेरे इस उलझे हुए मन की गाँठों को सुलझाना ही पड़ेगा। [3]

श्री हरे कृष्ण जी विनयपूर्वक कहते हैं—“हे प्रभु, एक दिन तुम्हें अपनी अद्वितीय और अनुपम छवि का दर्शन मुझे अवश्य कराना ही होगा।” [4]