(राग धनाश्री)
आरती कीजै जुगलकिसोर की ।
नखसिख अंग बलैया लीजै, साँझ दुपहरी भोर की ।। [1]
भूषण पट नागरि नट अद्भुत, चितवनि चंचल कोरकी ।
व्यासदासि छबि नैंननि फबि रही, अंचल चंचल छोर की ।। [2]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्द्ध (97)
श्री युगल किशोर श्यामा श्याम की आरती कीजिए एवं संध्या, दोपहर एवं भोर में नख से सिख तक अंगों की पुनः पुनः बलैया लीजिए । [1]
श्री नागरी नट [श्यामा श्याम] के भूषण एवं वस्त्र अद्भुत हैं एवं चितवनि अत्यंत चंचल है । श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि श्री युगल किशोर की यह छवि उनके आँखों में समा गयी है जिसमें श्री राधा का नीलांबर एवं श्री कृष्ण के पीताम्बर का आँचल चंचलता से लहरा रहा है । [2]
आरती कीजै जुगलकिसोर की ।
नखसिख अंग बलैया लीजै, साँझ दुपहरी भोर की ।। [1]
भूषण पट नागरि नट अद्भुत, चितवनि चंचल कोरकी ।
व्यासदासि छबि नैंननि फबि रही, अंचल चंचल छोर की ।। [2]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्द्ध (97)
श्री युगल किशोर श्यामा श्याम की आरती कीजिए एवं संध्या, दोपहर एवं भोर में नख से सिख तक अंगों की पुनः पुनः बलैया लीजिए । [1]
श्री नागरी नट [श्यामा श्याम] के भूषण एवं वस्त्र अद्भुत हैं एवं चितवनि अत्यंत चंचल है । श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि श्री युगल किशोर की यह छवि उनके आँखों में समा गयी है जिसमें श्री राधा का नीलांबर एवं श्री कृष्ण के पीताम्बर का आँचल चंचलता से लहरा रहा है । [2]

