मेरी स्वामिनी लाड़िली, लाड़ लड़ाऊँ भाई - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (60)

मेरी स्वामिनी लाड़िली, लाड़ लड़ाऊँ भाई - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (60)

मेरी स्वामिनी लाड़िली, लाड़ लड़ाऊँ भाई ।
ना जानो गुन दोष को, श्री स्वामी संग पाई ॥

- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (60)

अरे भाई, मेरी आराध्या, मेरी सर्वस्व स्वामिनी तो एकमात्र श्री राधा महारानी जू ही हैं, और उन्हीं को मैं नित्य लाड़ लड़ाता हूँ। न मैं किसी अन्य के गुण जानता हूँ और न दोष; मेरा संग केवल रसिक-अनन्य नृपति स्वामी श्री हरिदास जी से है।