चारि वेद षदशास्त्र, अष्टादश जु पुरान - श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री वृंदावन माधुरी (80)

चारि वेद षदशास्त्र, अष्टादश जु पुरान - श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री वृंदावन माधुरी (80)

चारि वेद षदशास्त्र, अष्टादश जु पुरान ।
सकल सार कौ सार है, वृंदावन को ध्यान॥

- श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री वृंदावन माधुरी (80)

चारों वेदों, छहों शास्त्रों और अठारहों पुराणों के समस्त सार का भी सार यदि कुछ है, तो वह श्री वृन्दावन का ध्यान ही है।