जो बन बसौं तो बसौ वृन्दावन - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (1078)

जो बन बसौं तो बसौ वृन्दावन - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (1078)

(राग काफ़ी)
जो बन बसौं तो बसौ वृन्दावन, गाँव बसौं तो बसौं नन्दगाम ।
नगर बसौं तो मधुपुरी, यमुना तट कीजै विस्राम ।। [1]
गिरि जो बसौं तो बसौं गोवर्धन, अद्भुत भूतल कीजै ठाम ।
'कृष्णदास' प्रभु गिरिधर मेरौ, जन्म करौ इति पूरन काम ।। [2]
- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (1078)

यदि किसी वन में बसो हो तो वृंदावन में बसो, यदि गाँव में बसो तो नंद गाँव । यदि नगर में बसना हो तो मधुपुरी (मथुरा) और यदि तट पर विश्राम करना हो तो यमुना तट पर विश्राम करो । [1]

यदि किसी गिरि [पर्वत] पर बसना हो तो गोवर्धन पर बसो, यह पृथ्वी पर बसा हुआ पूरा ब्रज धाम ही अद्भुत है । श्री कृष्ण दास कहते हैं कि ब्रज धाम में वास कर, श्री गोवर्धन लाल श्री कृष्ण का भजन करके मेरा जीवन सफल हो गया है  । [2]